Friday, July 9, 2021

फिर वो अज़नबी कौन था ?

 

     फिर वो अज़नबी कौन था !!

          उस दिन राजेश बहुत खुश था । उसकी शादी की पांचवी साल गिरह थी । घर में एक छोटा सा फंक्शन रखा था इसलिये उसने सोचा आफिस (बैंक) से जल्दी घर लौट कर पत्नी कामनी के काम में कुछ मदद कर दूँगा ।



अपने बोस से आज्ञा ले, खर्चे के लिए उसने अपने अकाउंट से पाँच हज़ार निकलवाये औऱ बैंक से बाहर निकल गया ।

      अपनी गाड़ी निकाली और  घर की ओर रवाना हो चला । ख्यालों में मस्त--कॉलेज के दिनों के उन दोस्तों को आज उसे मिलना था जो कभी उसके हमनशीं औऱ हमबगल हुआ करते थे ।

बहुत खुश था वो जल्दी से घर पहुंचना चाहता था ।

घर के नज़दीक वाली आख़री लाल बत्ती के पास भीड़ देख ठिठक गया । उसने गाड़ी थोड़ी धीमी कर ली थी । शायद कोई एक्सीडेंट हुआ था । कुछ पल के लिए उसने गाड़ी रोकी । लेकिन अगले ही पल ये सोच कि खामखाँ घर लेट हो जाऊँगा उसने गाड़ी को आगे बढ़ा दिया ।

घर पहुँच उसने गाड़ी खड़ी की औऱ अंदर पहुँचा, वहाँ तैयारी अभी आधी अधूरी ही थी ।

माँ बाबूजी दोस्त यार कुछ नज़दीकी रिश्तेदार सब एक दूसरे से बतिया रहे थे । सब खुश थे । उसने माँ से पूछा- 'माँ कामनी कहाँ है ? सारा काम पड़ा है कहीं दिखाई नहीं दे रही ।"

"वो बेटा -- केक लेने गयी है, बोल रही थी आफिस से आकर तुम कहाँ भागते फ़िरोगे" -- माँ सुहासिनी ने मुस्कुराते हुए फट से जवाब दिया ।

ये सुन मुस्कुराते हुए सोचने लगा कि चलो ये भी अच्छा हुआ कामिनी ने ये काम भी निपटा दिया औऱ टेबल को आँगन में खिसकाने लगा । साथ में राजेश का दोस्त हरि भी साथ देने लगा  ।

इस बीच राजेश का मोबाइल दो बार बजा लेकिन बिना देखे काल बंद कर रहा था  । अबकि बार फ़ोन बजा तो हरि ने बोला --- "यार बात कर लो न, कोई ज़रूरी काल भी तो हो सकती है ?"

घंटी फिर से बज उठी । इस बार घंटी बजी तो राजेश ने फ़ोन पर नंबर देखा तो बोला -- "ओए ये तो कामिनी का है"

फ़ोन  पिक कर जैसे ही हेलो बोला--उधर से एक अज़नबी औऱ भारी भरकम आवाज ने बड़े ही शालीनता से पूछा --- "आप राजेश जी बोल रहे हैं ?"

"आप कौन ? कामिनी कहाँ है ?" -- राजेश घबराया हुआ बोला औऱ कई प्रश्न दाग दिए ।

देखिये मैं  "आल इंडिया मेडिकल अस्पताल" से रमेश रोहतगी बोल रहा हूँ जिसका ये फ़ोन है उसका एक्सीडेंट हो गया है और वो यहाँ एम्स में दाख़िल है । मैंने उनके फ़ोन से ही आख़िरी काल को डायल कर दिया है । आप अगर इन्हें जानते हैं तो मेहरबानी कर के उनके किसी रिश्तेदार को  इन्फॉर्म कर दीजिए" ----उसने आग्रह किया ।

कामिनी के फ़ोन से एक अज़नबी इंसान की आवाज में,  ये सब सुन कर राजेश सुन्न हो कुछ बोल ही नहीं पाया ।

लड़खड़ाती आवाज में उसने बस यही कहा-- "हाँ मैं कामिनी का हस्बैंड बोल रहा हूँ  उनको~~~~।"

             हरि, राजेश को घबराते हुए बात करते देख उसने, उससे फ़ोन खींच लिया और उस अजनबी से बात की । उसने जो-जो बताया --- फ़ोन बंद कर,  माँ बाबूजी को सलीके से सुना दिया कि भाभी का छोटा सा एक्सिडेंट हुआ है  । बाबूजी को तसल्ली देते हुए कहा - " वैसे घबराने वाली कोई बात नहीं है, कामिनी भाभी ठीक है "

हरि के खुद के पैरों तले ज़मीन खिसक चुकी थी ।

            माँ, बाबूजी औऱ राजेश,  इन तीनों को लेकर हरि ने अपनी गाड़ी एम्स की ओर दौड़ा दी ।  राजेश को याद आ रहा था उसने अपने घर के नज़दीक वाली रेड लाइट पर एक एक्सीडेंट देखा तो था । रुका भी था । क्या वो कामिनी थी?  वो फिर खुद को कोसने लगा कि मुझे गाड़ी से उतर कर देखना चाहिए था यही सब बुदबुदाता जा रहा था ।

                 अस्पताल पहुँच, माँ बाबूजी को बाहर बिठा,  हरि औऱ राजेश सीधे इमरजेंसी विभाग पहुँचे । वहाँ पर सभी की ज़ुबाँ एक ही एक्सीडेंट की  चर्चा में थी । हरि सब समझ चुका था ।

पूछ ताछ कर उन्हें पता लगा कि कामिनी को आपरेशन थियेटर ले जाया जा चुका है ।

               राजेश के कान में वही भारी भरकम आवाज अभी तक बड़े ही जोरों से बज रही थी । कामिनी का फ़ोन उसी के पास था ।

उसके बारे में इधर-उधर पूछा तो किसी से कुछ मालूम न चला ।

तीन घंटे हो चुके थे ऑपेरशन चलते हुए । इतने में लाँज में कामिनी के नाम की अनाउंसमेंट हुई ।

हरि औऱ राजेश तेजी से काउंटर की ओर दौड़े ।

वहाँ से पता लगा कि ऑपरेशन ठीक-ठाक हो गया है । आप में से एक लोग पांचवे तल पर डाक्टर अमित से मिल सकते हैं इस के लिए ये स्लिप है ले लीजिये ।

जल्दी से राजेश औऱ हरि लिफ्ट की ओर भागे ।

लिफ्ट मैन से कुछ बातचीत कर दोनों ऊपर पहुंचे ।
डाक्टर से मुलाकात हुई - उन्होंने बताया कि पेशेंट अभी बेहोश है । 36 घंटे इंतज़ार करनी होगी ।
सर में 67 टाँके लगे हैं ।

राजेश ने बताया - "मैं कामिनी का हसबैंड हूँ ।"

डाक्टर ने बताया - 'ये तो अच्छा हुआ उनके भाई साहब एन वक़्त पे उन्हें यहॉं ले आये ।"

"उनके भाई ???---ये सुन चोंकते हुए दोनों हरि औऱ राजेश ने एक दूसरे की ओर देखा ।

"हाँ वो हैं न रमेश रोहतगी ?" - डाक्टर ने आगे
कहा -- "वो थे इसीलिए शायद उनके बचने के चाँस बने हुए हैं ।"

डाक्टर भी अपने इस कामयाब आपरेशन पर ख़ुश लग रहा था और आगे कहने लगा - सच बताएं तो, जैसे ही हमें ये पता चला कि आपकी पत्नी का ब्लड ग्रुप माइनस बी है,  हमारी तो हालत ही खराब हो गयी थी । ये ब्लड ग्रुप तो बहुत रेयर ग्रुप है । स्टॉक में भी नहीं था । सब ब्लड बैंक्स को लाइटनिंग कॉल भेजी गई ।"

डाक्टर ने फिर कहा---"रमेश रस्तोगी को पता चलते ही उन्होंने बताया चिंता न करें उसका ब्लड ग्रुप माइनस बी है उन्होंने  सारी ज़िम्मेवारी अपने ऊपर ले सारे फार्म भरे और देखिये न उनका रेयर ब्लड ग्रुप -बी (माइनस बी) जो मिलने की संभावना, न के बराबर ही होती है  डायरेक्ट कामिनी को चढ़ाना पड़ा ।"

"रोहतगी जी कहाँ हैं इस वक़्त?"--राजेश औऱ हरि ने उत्सुकता वंश दोनों ने इकट्ठे पूछा ।

"वो भी अभी अंदर ही हैं रिकवरी रूम में । उन्हें अभी आराम की सख्त जरूरत है । अपनी जान खतरे में डाल उन्होंने एक की जगह आधी यूनिट फालतू ब्लड लेने की इज़ाज़त दी ।" ---डाक्टर अमित ने बताया ।

ये ग्रुप अस्पताल में भी नहीं था ।

हरि औऱ राजेश कामिनी के साथ रमेश के अच्छा होने की दुआएं मांगने लगे ।

              अगले दिन रमेश रोहतगी को बाहर भेज दिया गया । एक 30 -- 35 साल का गोरा चिट्टा जवान ।   उसने एक्सीडेंट से लेकर अस्पताल का सफ़र कैसे सब विस्तार से बताया ।

                उसने बताया --- "कि वो तो बाई चांस उधर से गुज़र रहा था कि अचानक एक बहुत तेज़ मिनी बस एक लेडी को उड़ाती हुई निकल गयी । लेडी के हाथ में शायद केक था जो आसमान में उछला । मैं मोटर साइकिल पे था । पुलिस ने उसको गिरफ्तार तो कर लिया है ।"

रमेश अपनी मोटर साइकिल को लेने जाने की बात कह वहाँ से जाना चाहता था ।

अब हरि औऱ राजेश दोनों  हाथ जोड़े उसके आगे गए और समझ नही आ रहा था कि उनका अब कैसे धन्यवाद दें ----इस असमंझस को देख रमेश समझ गया ।

             वो  खुद आगे बढ़ा और उसने दोनों को तसल्ली दी कि उसने अपना फर्ज़ निभाया है । वो मेरी भी बहिन है अगर आप इज़ाज़त दें तो । मेरी कोई बहिन नहीं है उसे बहिन मान लूँ ।

राजेश की ऑंखें अश्क़ों से तरबतर हो गईं ।

उसने कहा मुझे अब उस रेड लाईट से अपनी मोटर साइकिल उठानी है , मैं अभी चलता हूँ------- 'फिर आता हूँ" -- ये कह के वो शख्स कामिनी का मोबाइल राजेश के हाथों में सौंप अलविदा कह--- हाथ हिलाता चला गया ।

                     पंद्रह दिन के ख़ौफ़ भरे दिन देखने के बाद  राजेश औऱ हरि कामिनी को लेकर अस्पताल से विदा होने के लिए बाहर आये ।

लेकिन वो शख्स (रमेश रोहतगी) इन 15 दिनों में एक बार भी अस्पताल नहीं आया ।

परेशानी में दिमाग इतना ख़राब कि उस शख्स से   उसका नंबर तक लेना भी वो भूल गए ।

अस्पताल का रिकॉर्ड देखा तो उसमें उसके एड्रेस की जगह उन्हीं का एड्रेस लिखा था ।

शायद कामिनी के फ़ोन से देख कर लिखवा दिया होगा। । ये सोच के अपने आप को तसल्ली दी कि उसने कामिनी को अपनी बहिन माना है तो शायद वो घर पर ज़रूर आएगा ।

कामिनी को ले हम घर पहुँचे ।

पांच छः दिन बाद शाम को चाय के वक़्त कामिनी भी सब के साथ कुर्सी पर बैठ गयी । अब कामिनी अच्छे से अपने भाव में आने लगी थी । साल गिरह का वो दिन सहसा ही याद आ लगा ।

एक्सीडेंट का वो पूरा सीन उसके मस्तिश्क पटल पर ऐसे घूम गया कि अचानक वो बोल उठी -- "बाबूजी वो बुजुर्ग कहाँ गया ? वो कौन था ?? जिसने मुझे गौद में लपका ?  मुझे ज़मीन पर गिरने नहीं दिया उसने ।"

सभी चोंक गए और हैरान होकर राजेश ने पूछा -- "कौन बुज़ुर्ग ??"

राजेश यही समझ रहा था कि वो शायद रमेश रोहतगी की बात कर रही है ।

कामिनी ने फिर वो सीन दोहराया--- " मैं जब केक लेकर लौट रही थी तो एक बस ने मुझे पीछे से जोर से टक्कर मारा और मैं आसमान की तरफ 10-12 फुट ऊपर उछली । जब मैं नीचे गिरने लगी तो वो बुज़ुर्ग जिसकी बहुत लंबी सफेद दाढ़ी थी सफेद पगड़ी औऱ सफेद कुर्ता पायजामा ।  उसने मुझे अपनी गोद में लपक लिया ।  बाबूजी मेरी एक नज़र उनके चेहरे पर पड़ी, क्या नूर था । उसके बाद मुझे क्या हुआ कुछ पता नहीं ।

लेकिन अब राजेश सोच में पड़ गया । ये अज़नबी अगर रमेश रोहतगी था तो उसकी दाढ़ी नहीं थी ।

राजेश की भौहें तन गईं औऱ सोचने लगा ।

फिर?

फिर वो अजनबी कौन  था ?

---हर्ष महाजन 'हर्ष'

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4 comments:

  1. बहुत सुंदर कहानी

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  2. बहुत बहुत शुक्रिया आपका आदरणीय विनभारती जी💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐

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  3. बहुत सुन्दर कहानी...अन्त में प्रश्नचिन्ह छोड़ती ।
    शुरू से अंत तक पाठक को बाँधे रखने में सक्षम।

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